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आजादी के 55 सालों बाद चुनाव से दूर अवामी लीग, जानिए कितनी बार बांग्लादेश की पीएम रह चुकीं शेख हसीना?

Written By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Feb 12, 2026 11:08 am IST, Updated : Feb 12, 2026 11:08 am IST

बांग्लादेश में हो रहे चुनाव में अवामी लीग को बाहर किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अगस्त 2024 में पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद भारत आ गईं थीं। इस रिपोर्ट में जानिए शेख हसीना कितनी बार बांग्लादेश में प्रधानमंत्री चुनी गईं और उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा?

Former Bangladesh PM Sheikh Hasina- India TV Hindi
Image Source : AP AND INDIA TV GFX बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना

बांग्लादेश में आज (12 फरवरी) आम चुनाव हो रहे हैं। इस चुनाव से तय हो जाएगा कि बांग्लादेश की आवाम किसे अपना प्रधानमंत्री चुनती है। बांग्लादेश में आज 300 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। बांग्लादेश में कुल 350 सीटों वाला संसद है। 300 सीटें सीधे चुनी जाती हैं, बाकी 50 सीटें बाद में भरी जाती हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना के भारत भागने के बाद पहली बार बांग्लादेश में आज वोटिंग हो रही है। इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को बाहर किया गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी, नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), जातीय पार्टी और कई स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं।

 55 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा ऐसा

बांग्लादेश की आजादी (1971) के बाद पहली बार अवामी लीग किसी राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है। यानी 1971 से अब तक के 55 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है कि यह पार्टी चुनावी मैदान से बाहर है। बांग्लादेश में शेख हसीना वहां की कद्दावर नेता हैं। जो कि अब अपना देश छोड़कर भारत भाग आई हैं।

5 बार की प्रधानमंत्री रह चुकीं शेख हसीना

बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना का नाम इतिहास के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली महिला नेता के रूप में दर्ज है। बांग्लादेश की आजादी के बाद से अब तक वे कुल 5 बार प्रधानमंत्री रही हैं। पहली बार 1996 में और फिर 2009 से 2024 तक वह लगातार चार बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। बांग्लादेश में वह लगभग 20 साल से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रही हैं। इसमें 2009-2024 के बीच शेख हसीना का पीएम के रूप में 15 साल तक सबसे लंबा कार्यकाल रहा है।

पहली बार 1996 में बनी प्रधानमंत्री

बांग्लादेश में शेख हसीन पहली बार जून 1996 में प्रधानमंत्री बनीं। ये कार्यकाल साल 2001 तक चला था। शेख हसीना जून 1996 में अवामी लीग की जीत के बाद 23 जून 1996 को पहली बार प्रधानमंत्री बनीं थीं। यह उनका पहला कार्यकाल था, जो जुलाई 2001 तक चला था। इस दौरान वे पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली बांग्लादेश की पहली पीएम बनीं थीं।  

साल 2009 में सभाली दूसरी बार सत्ता

शेख हसीना दूसरी बार साल 2009 में प्रधानमंत्री बनीं थीं। ये कार्यकाल साल 2014 तक चला था। शेख हसीना दिसंबर 2008 के चुनाव में भारी जीत के बाद जनवरी 2009 में दोबारा सत्ता संभाली थी।  

2014 के चुनाव का BNP ने किया बहिष्कार

शेख हसीना तीसरी बार 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। साल 2018 तक वह पीएम रहीं। 2014 के चुनाव का मुख्य विपक्ष पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बहिष्कार किया था। इसी चुनाव में शेख हसीना ने लगातार तीन बार पीएम के रूप में बने रहने की हैट्रिक मारी थी।

2018 में चौथी बार शेख हसीना बनीं प्रधानमंत्री

बांग्लादेश में शेख हसीना चौथी बार 2018-2024 के बीच प्रधानमंत्री चुनी गईं थीं। 2018 के चुनाव में एक बार फिर अवामी लीग की जीत ने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया था। बांग्लादेश में अवामी लीग पार्टी लगातार अपने झंडे बुंलद कर रही थी।

पांचवीं बार पीएम बनीं और देश छोड़कर भागना पड़ा

साल जनवरी 2024 में शेख हसीना पांचवीं बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं थीं। बांग्लादेश का ये चुनाव काफी विवादों में रहा था। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव का बहिष्कार किया था। बीएनपी ने इसे नकली चुनाव करार दिया था। तब विपक्षी नेताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं थीं। इसको लेकर बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ जन आंदोलन भी शुरू हो गए थे। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसा के बाद शेख हसीना को पीएम पद से इस्तीफा देने के  बांग्लादेश छोड़ना पड़ा और वह भाग कर भारत आ गईं।

शेख हसीना के बगैर बांग्लादेश में चुनाव

अब 12 फरवरी 2026 के चुनाव में अवामी लीग के बहिष्कार और प्रतिबंध के कारण 55 साल बाद ऐसा हो रहा है कि बांग्लादेश का सबसे पुराना राजनीतिक दल चुनावी मैदान में नहीं है। शेख हसीना की अनुपस्थिति में बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) जैसे नए चेहरे इस बार सत्ता की दौड़ में हैं। यह चुनाव न सिर्फ बांग्लादेश की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि हसीना के लंबे शासनकाल के बाद की कहानी भी लिखने वाला है।

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